Science a curse or a blessing (विज्ञान एक वरदान अथवा अभिशाप)?

Science a curse or a blessing - विज्ञान एक वरदान अथवा अभिशाप? 

प्रस्तावना:- आग और पहिये की दो बड़ी खोज करने के साथ ही मानव सभ्यता से अन्धविश्वास का अन्धकार दूर होने लगा ! तभी से मानव ने तर्कों और सिद्धांतो का अनुसरण करना प्रारंभ किया ! आज भी विज्ञान और धर्म ग्रन्थ परस्पर विरोधी ही है क्योकि विज्ञान इन सब बातो को तब तक नहीं मानता जब तक वह घटना आँखों के सामने घटित न हो ! इस प्रकार विज्ञान उन लोगो को नहीं भाता जो धर्म के नाम पर अंधविश्वास का पोषण करते हुए अपने स्वार्थ की पूर्ति करते है और इसकी सत्यता को सिद्ध नहीं कर पाते है ! जबकि विज्ञान कार्य को पूर्ण सत्यता के कारणों सहित परिभाषित करता है ! यह प्रत्यक्ष में विश्वास रखता है परोक्ष में नहीं ! इस प्रकार समय के परिवर्तन होने पर जो मनुष्य प्राचीन काल से धर्म पर आश्रित था वह आधुनिक युग में विज्ञान के तर्क और सिद्धांतो के बल पर इसका समर्थन पाकर आज इसका नेतृत्व भी कर रहा है ! आज की आधुनिक जीवन –शैली पर विज्ञान के मिश्रित प्रभाव सामने उभर कर आये है ! इनमे कई सकारात्मक और मानव सभ्यता के लिए वरदान है वही तकनीक के दुरपयोग से इसके नकारात्मक परिणामो की भी छवि सामने आई है.
विज्ञान वरदान के रूप में :- विज्ञान ने समय और दूरी को कम कर आज के व्यस्त मानव को सबसे बड़ी सौगात दी है ! कई प्रकार की गम्भीर बिमारियों का इलाज विज्ञान के दम पर ही हो रहा है ! सारा विश्व ही आज के विज्ञान पर टिका होने से आज का युग विज्ञान का युग कहलाता है ! कुछ विकसित देशो द्वारा एक से बढ़कर एक किये गए आविष्कारो से विज्ञान अज अपनी चरम सीमा पर पहुच गया है ! विशेष शोध और विस्तृत ज्ञान को ही विज्ञान कहा गया है इसमें सूर्य, चन्द्रमा, प्रथ्वी से लेकर जीव, जगत, वनस्पति आदि सब सम्मिलित है ! यहाँ तक की विज्ञान तो प्रथ्वी के गर्भ में स्थित धातु, मिटटी, गैस, वातावरण, समुद्र की गहराई, पर्यावरण आदि सब की विस्तृत विवेचना करता है ! संचार और यातायात के सारे साधन विज्ञान की ही देन है ! कार्यालयों में कंप्यूटर और इन्टरनेट के प्रयोग से त्वरित और सटीक सुचना मिल रही है ! आज सामान्य व्यक्ति भी मोबाइल और इन्टरनेट की पहुच होने से सारे संसार से जुडा रहता है ! आज का विज्ञान अन्तरिक्ष शोध और अन्य ग्रहों पर जीवन की उपलब्धता की सत्यता भी प्रमाणित करता है ! समय रहते किसी चक्रवात जैसी आपदा की सुचना मिलने से आवश्यक प्रबंध कर लिए जाते है और जन-धन की हानि को रोक लेने में सहायक है ! एक समय में कुछ किलोमीटर सुचना पहुचाने में ही कई दिन लग जाते थे पर आज रेडियो और टेलीविज़न से सेकड़ो किलोमीटर दूर की घटना को सुन और देख भी सकते है ! चिकित्सा क्षेत्र में मानव अपने भीतरी अंगो को भी देख सकता है ! मुद्रण कला में तेजी आने से किसी भी पत्रिका या पुस्तक की सेंकडो प्रतिया आसानी से छप जाती है ! विधुत के आ जाने से अनेको विधुत उपयोगी यंत्र भी बाज़ार में आ गए है ! एस्केलेटर जैसी स्वचालित मशीन से ज़िन्दगी आसान हो गयी है.
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विज्ञान अभिशाप के रूप में:- तमाम भौतिक सुख-सुविधाए देने के साथ ही विज्ञान का दूसरा पहलु भी इसके साथ ही जुडा हुआ है ! विज्ञान सुविधा के साथ ही विनाश को भी आमंत्रित करता है ! कई प्रकार के स्वचालित हथियार, पनडुब्बी, विमानभेदी तोपे और परमाणु रसायन आदि कभी भी विश्व युद्ध की परिस्थिति को जन्म दे सकते है ! दूरी और समय बचाने के लिए सेंकडो यात्रियों को लेकर उडा विमान उन्हें असमय ही काल का ग्रास बना सकता है ! इसी प्रकार एक ही लाइन पर आई दो रेल गाड़िया या फिर तेज रफ़्तार दौडती बसे बनी तो सुविधा के लिए ही है पर ये समय-समय पर भयंकर दुर्घटनाओ की घटना को भी जन्म देती रहती है ! परमाणु हथियार आतंकियों के हाथ लगने से समूची मानव सभ्यता को ही गंभीर खतरा हो सकता है ! कई प्रकार की विषेली गैस और रसायन और कीटनाशको का क्रषि आदि में प्रयोग किये जाने से यह गंभीर बिमारियों के लिए उत्तरदायी है ! साइबर क्राइम को भी विज्ञान ने ही जन्म दिया है ! वर्तमान में तकनीक की अधिकता से सामाजिक संवाद कम हो रहा है जिससे लोगो का मेल-मिलाप लगातार कम होता जा रहा है.
उपसंहार:- इस प्रकार यह विश्लेषण किया जाना तो अत्यंत कठिन ही है की विज्ञान मानव के लिए वरदान बना या फिर शाप किन्तु सभी क्षेत्रो में विज्ञान का सदुपयोग या दुरूपयोग किया जाना अंततः मानव के ही हाथ में है ! इसलिए हमे इस आधुनिक तकनीक का और इन सब यंत्रो का प्रयोग अत्यंत ही सावधानी से और मानव के हित में ही करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना होगा की सुविधा के यह सब साधन हमारे लिए संकट का माध्यम न बन जाये.

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