ताज महल: प्रेम का अमर प्रतीक के बारे में जानकारी?

प्रस्तावना:- ताज महल की गिनती के बिना विश्व के सात आश्चर्यो की पूर्ण रूप से गणना नहीं की जा सकती ! अमर और पवित्र प्रेम की यह प्राचीन ईमारत आगरा शहर के दक्षिण में स्थित है ! मुग़ल बादशाह शाहजहा ने इसे अपनी प्रेयसी और इस साम्राज्य की साम्राज्ञी रानी मुमताज महल की स्मृति को चिर काल तक बनाये रखने के उद्देश्य से इस अद्भूत महल का निर्माण कराया ! ताज महल इतिहास की अन्य इमारतो में स्थापत्य कला का सुन्दर नमूना है ! यमुना नदी की दाई और खड़ी यह भव्य इमारत आज भी प्रेम के प्रतीक रूप में विश्व की सुन्दर इमारत मानी जाती है ! आज भी विश्व भर के लोग ताज को देखने के लिए भारत आते है ! इस प्रकार यह भारत के देसी-विदेशी पर्यटकों के सर्वाधिक भ्रमण का अनुकूल और प्रसिद्ध पर्यटक स्थल है.
शिल्प कला की अद्भूत रचना:- ताज महल की बनावट अत्यंत ही रमणीय और मन को मोह लेने वाली है ! ताज महल के निर्माण में सिर्फ सफ़ेद रंग के संगमरमर का प्रयोग हुआ है ! 1631 में इसका निर्माण शुरू होने के बावजूद कुशल कारीगरी में अधिक समय लगने और कई प्रकार के बारीक काम होने से यह 1635 में अपने पूर्ण रूप में आया था ! इसके निर्माण में प्रयुक्त होने वाला सफ़ेद संगमरमर राजस्थान के नागोर से लाया गया और लाल पत्थर धोलपुर से मंगवाया गया ! काले और पीले पत्थर नर्बाद और चर्कोह नामक स्थान से भी मंगवाए गए ! कुछ कीमती पत्थर और सोने-चांदी का अन्य सामान उस वक़्त के अन्य सम्राटो और राजाओ से भी लिए गए ! और भी कई आवश्यक साजो सामान और ओजार दूर-दराज से मंगवाए गए थे ! इतिहासकार इस प्रसिद्ध महल की तत्कालीन लागत को लेकर अपने-अपने मत बताते है ! ऐसा सर्वमान्य है की पचास लाख से पांच करोड़ रूपये तक इसकी लागत आई थी ! बादशाहनामा में भी साफ़ लिखा है की प्रतिवर्ष एक लाख रूपये तो आगरा (परगना) से केवल इसके रख-रखाव के लिए उगाही की जाती थी.
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प्रेम का प्रतीक:- रानी मुमताज की वजह से ही इस भव्य इमारत का नाम ताजमहल रखा गया था ! इसमें प्रवेश करने के लिए पत्थर का एक विशाल दरवाजा पार करना पड़ता है जिस पर कुरआन शरीफ की कई आयते लिखी है ! इसके बाद शानदार बगीचा जिनमे लगे समान आकार के सुसज्जित फूलो से लदे पेड़ और साफ़-सुथरी सीधी सड़क आपको अनायास ही इस सुन्दर भवन की और आकर्षित करती है ! बीच की सुंदर झील में रंग-बिरंगी मछलिया तैर रही है, कलात्मक फव्वारे लगे हुए है ! आगे अत्यंत विशाल चबूतरा है जिस पर चार मीनारे इस प्रकार गर्व से खड़ी है मानो ताज की सुरक्षा में लगे हुए प्रहरी हो ! फ्रांस के एक यात्री बर्नियर ने इसके भ्रमण पर कहा-‘ताज महल जैसे स्मारक को ही विश्व का सातवा अचरज कहा जाना चाहिए न की मिस्त्र के भोंडे पिरामिडो को.
ताज: वर्तमान परिप्रेक्ष्य में :- आज ताज की भव्यता और विशेषता को सरकार ने संरक्षण की आवश्यकता मानते हुए इसके भविष्य को लेकर कई कदम उठाये है ! रात्रि में केवल पांच दिन इसका प्रवेश रखा गया है जो पूर्णिमा के दिन, इसके दो दिन पूर्व में और दो दिन बाद तय किया गया है ! साथ ही उर्स के दौरान, रमजान के महीने और शुक्रवार को ताज का प्रवेश बंद किया गया है ! रात्रि भ्रमण की फीस भी 1000 रूपये रखी गयी है और एक रात्रि में सिर्फ 400 पर्यटक ही भ्रमण कर पायेंगे ! सुरक्षा सम्बन्धी कारणों से अब दर्शको को मेटल-रोधी यंत्रो से जाँच करवाकर गुजरना पड़ता है ! इस परिसर में सिर्फ पचास लोगो का समूह ही एक बार में प्रवेश कर सकता है ! और उनके भ्रमण की अवधि भी सिर्फ तीस मिनट ही निर्धारित की गयी है ! इसकी 350 वी वर्षगाँठ पर मुख्य मंत्री मुलायम सिंह यादव ने ताज महोत्सव का उद्घाटन किया और प्रसिद्ध गजल-गायकों गुलाम अली और हरी हरण आदि को बुलाकर इस उत्सव को भव्यता देने की सफल कोशिश भी की ! कला और संगीत का यह पर्व कई दिनों तक चला और कई कलाकारो ने इसमें रंगारंग प्रस्तुतिया दी ! ताज महल आज भी दुनिया भर से पर्यटकों को भारत की और आकर्षित करता है ! स्विट्ज़रलैंड की एक व्यक्तिगत संस्था ने दुनिया के सात अजूबो का विश्व भर से चयन करने की एक मुहिम चलाई जिसका नाम था- ‘न्यू सेवेन वंडर्स फाउंडेशन’ ! इसमें दुनिया भर के स्मारकों को चुना गया था और वोटिंग के लिए मोबाइल और इन्टरनेट के माध्यम से इसका चुनाव किया गया ! और इस अभियान में लगभग 10 करोड़ वोट भी पड़े ! पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में इसके परिणाम घोषित किये गए और प्यार के अजूबे ताजमहल को इसमें पहला स्थान मिला ! हलाकि इस नयी सूची को यूनेस्को की मान्यता अब तक नहीं मिल पाई है.

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