Learn about "civil nuclear agreement" between INDIA and USA in hindi?

भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता (civil nuclear agreement) पर हिंदी निबंध?
परिचय:- भारत और अमेरिका से सम्बंधित असैन्य परमाणु समझौते के दस्तावेज अगस्त 2007 में जैसे ही विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी हुए तो इस समझौते की सारी शर्तो की शंकाऐ भी समाप्त हो गयी ! इस समझौते के हस्ताक्षर जुलाई 2005 में ही भारत के प्रधान मंत्री डा. मनमोहन सिंह और अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने वाशिंगटन में ही कर दिए थे ! इस समझौते को आकार लेने तथा इसकी क्रियान्विति में लगभग तीन साल लग गए और यह 10 अक्टूबर 2008 को विधिवत अपने वास्तविक रूप में आया ! लम्बे दौर की बातचीत के बाद यह समझौता अपने असली उद्देश्य तक पंहुचा था ! भारत की संसदीय व्यवस्था में विपक्षी दलों की सहमती और समर्थन लेना पड़ा तब जाकर इसकी आंतरिक स्थिती स्पष्ट हुई ! अमेरिका ने भी इसमें आवश्यकतानुसार विशेष रूचि दिखाई और ये अपने मुकाम तक पहुच गया किन्तु दोनों देशो के राष्ट्रिय और अन्तराष्ट्रीय लाभ और अन्य राष्ट्रों से सम्बन्ध को द्रष्टिगत रखते हुए इसका गहराई से विश्लेषण किया जाना अति आवश्यक है.
भारत को इसकी आवश्यकता:- आज भारत को अत्यधिक उर्जा की आवश्यकता है ! और इसकी जरूरत की पूर्ति के लिए यह समझौता अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत के कई परमाणु रिएक्टर तो उर्जा की कमी से, तो कुछ नई तकनीक के उपयोग की कमी से ही बंद पड़े है ! भारतीय अर्थव्यवस्था को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक, साइबर, सामरिक और अन्तरिक्ष आदि क्षेत्रो में लगातार प्रतिस्पर्धा मिल रही है ! इसलिए उर्जा-पूर्ति तथा नई-नई- तकनीको का उचित प्रयोग करने के लिए भारत का यह समझोता अत्यंत ही लाभदायक सिद्ध होता है ! उर्जा का आंतरिक विकल्प तलाशने पर भी हमे भविष्य में इन देशो की आधुनिक तकनीक की आवश्यकता पड़ सकती है इसलिए भारत को परमाणु की पूर्ति करने वाले देशो से अच्छे सम्बन्ध बनाये रखना और उनके साथ ताल-मेल से चलना बहुत ही जरूरी है.
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समझौते की विशेषता:- 22 पेज के इस समझौते में साफ़ किया गया की अगले 40 वर्ष तक अमेरिका भारत को बिना किसी विशेष शर्त के परमाणु रिएक्टर के लिए ईधन देता रहेगा न ही भारत के सामरिक द्रष्टि के किसी मामले में हस्तक्षेप करेगा और साथ ही यह अवधि 40 साल के बाद और 10 वर्ष के लिए बढाई जा सकती है ! 1974 के पोकरण में परमाणु परिक्षण के बाद सभी परमाणु संपन्न देशो (NSG) ने भारत को ईधन की आपूर्ति तथा अन्य किसी भी प्रकार की तकनीक के हस्तांतरण पर रोक लगा दी थी ! जिसके बदले में भारत के असैन्य परमाणु प्रतिष्ठानों के निरिक्षण की अनुमति अन्तराष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (IAEA) को भारत सरकार को देनी पड़ी थी.
उपसंहार:- इस प्रकार एक और तो भारत की उर्जा सम्बन्धी समस्या स्थायी रूप से हल होगी वही नई तकनीक के प्रयोग से हमारे यहाँ के वैज्ज्ञानिक और रक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए अन्य लोग भी इस प्रक्रिया और तकनिकी ज्ञान से अवगत होंगे और यहाँ की युवा प्रतिभा को इस क्षेत्र का ज्ञान और लाभ भी मिलेगा ! साथ ही अस्थायी रूप से बंद पड़े परमाणु रिएक्टर आदि के लिए तो यह समझौता संजीवनी का काम करेगा ! हम अपने प्राक्रतिक संसाधनों का उचित और व्यापक प्रयोग कुशलता से कर पाएंगे क्योंकि भारत जैसे विकाशशील देश को इसकी आवश्यकता अत्यंत जरूरी है ! और भविष्य में अमेरिका के हाथ खीच लेने पर अर्थात इस सम्बन्ध में सहायता से मना करने पर भी हम परमाणु परिक्षण और परमाणु आपूर्ति में इतने कुशल तो हो ही जायेंगे की अपने संयत्रों का कुशल संचालन कर सकेंगे और अपने स्तर की पूर्ति के लिए परिपक्व भी हो सकेंगे ! यह समझौता लागु होने के तुरंत बाद से ही इसका फायदा भारत को विदेश निति, कूटनीति,सामरिक स्थिती तथा अन्य विदेशी राष्ट्रों से सम्बन्ध में मिलने लगेगा-जैसे अन्य राष्ट्रों से सीमा-विवाद हो या फिर हथियारों की खरीद-आदि ! साथ ही हमारे पडोसी दो मुख्य राष्ट्र चीन और पाकिस्तान पर भी इसका दबाव बनेगा जिससे भारत की स्थिती विश्व पटल पर और मजबूत होने की और अग्रसर होगी ! चुकी अमेरिका ने भविष्य में भारत के किसी सामरिक कार्यक्रम में हस्त क्षेप करने से पूर्व में ही मना कर दिया था अत: इस हालत में भी भारत के समस्त परमाणु कार्यक्रम आदि जारी रहेंगे और इस प्रकार इसकी नीतियों में कोई परिवर्तन भविष्य में भी नहीं होंगे और अन्य विकसित देशो पर इसकी निर्भरता कुछ हद तक तो कम हो ही जाएगी ! इसका कूटनीतिक लाभ भी मिलने लगेगा और हमारे मित्र राष्ट्रों की संख्या लगातार बढ़ेगी ! इस प्रकार भारत और अमेरिका के बीच होने वाले इस असैन्य परमाणु समझौते से भारत को हर तरफ से लाभ ही हुआ है और यह इस क्षेत्र में इसके आगामी वर्षो तक का स्थायी और अनुकूल मार्ग तय करता है ! इससे भारत की छवि सम्पूर्ण राष्ट्रों तथा राष्ट्राध्यक्षो के साथ –साथ अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (IAEA) के सामने भी व्यापक और उज्जवल बनी है.

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